आजाद के विदाई भाषण में रो दिए मोदी, थोड़ा किसानों के लिए भी रो दीजिए; सदन में TMC सांसद ने मारा ताना

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लोकसभा चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के रमेश बिधूड़ी ने आरोप लगाया कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उनमें कोई किसान नहीं है। दिल्ली की सीमाओं के आसपास के एक भी गांव का नागरिक इनमें शामिल नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे अधिकतर किसान संगठनों के नेता भाकपा और माकपा के लोग हैं। उन्होंने कांग्रेस सहित विपक्ष पर किसान आंदोलन को पीछे से समर्थन देने का आरोप लगाया।

बिधूड़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘दैवीय शक्ति’ करार दिया और कहा कि वह दूरदृष्टि से काम करते हैं। उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बिना विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से काम करते हैं और पूरे देश को अपना कुटुंब मानते हैं जबकि विपक्ष के लोग ‘केवल एक परिवार’ को कुटुंब मानते हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति के एन नागेश्वर राव ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने में सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मांग उठाई कि किसानों को 24 घंटे बिजली दी जानी चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने कहा कि अगर किसान के लिए कानून बनाया और किसान नहीं मान रहे तो उसे खत्म करो। इसमें क्या दिक्कत क्या है? लोकतंत्र में जिद अच्छी बात नहीं है। रॉय ने कहा कि आज मैंने सुना कि दूसरे सदन में प्रधानमंत्री कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के विदाई भाषण में रो दिए। यह हृदय किसानों के लिए क्यों नहीं है? किसानों के लिए भी थोड़ा रोइए।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि ‘आंदोलनजीवी’ कहना ठीक नहीं है। आंदोलन को कमतर करना प्रधानमंत्री के पद को शोभा नहीं देता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने कहा कि अगर यह सरकार इतना अच्छा काम करती है तो इनके इतने सारे मंत्री पश्चिम बंगाल में ‘राजनीतिक पर्यटन’ नहीं करते। इससे कुछ नहीं होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘बांटने की राजनीति बंद होनी चाहिए। एक समुदाय को निशाना बनाना ठीक नहीं है।’’तेलुगू देसम पार्टी के श्रीनिवास केसिनेनी ने कहा कि सरकार को खुले मन से किसानों से बातचीत करनी चाहिए और समस्या का समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने आंध्र प्रदेश से जुड़े कई मुद्दे उठाए और कहा कि केंद्र सरकार को प्रदेश की मदद करनी चाहिए।



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